भक्ति दरबार
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অন্তর মম বিকশিত করো

Antara Mama Bikashita Karo

स्तोत्र · बांग्ला · रवीन्द्रनाथ ठाकुर

  1. অন্তর মম বিকশিত করো অন্তরতর হে— নির্মল করো, উজ্জ্বল করো, সুন্দর করো হে॥

    Ontoro momo bikoshito koro ontorotoro he. Nirmol koro, ujjol koro, shundor koro he.

    हे अंतरतम, मेरे अंतर को खिला दो। उसे निर्मल करो, उज्ज्वल करो, सुंदर करो।

  2. জাগ্রত করো, উদ্যত করো, নির্ভয় করো হে।
    মঙ্গল করো, নিরলস নিঃসংশয় করো হে॥

    Jagroto koro, uddoto koro, nirbhoy koro he. Mongol koro, nirolosh nihshongshoy koro he.

    उसे जाग्रत करो, तत्पर करो, निर्भय करो। उसे मंगलमय करो, आलस्य और संशय से मुक्त करो।

  3. যুক্ত করো হে সবার সঙ্গে, মুক্ত করো হে বন্ধ।
    সঞ্চার করো সকল কর্মে শান্ত তোমার ছন্দ।
    চরণপদ্মে মম চিত নিস্পন্দিত করো হে।
    নন্দিত করো, নন্দিত করো, নন্দিত করো হে॥

    Jukto koro he shobar shonge, mukto koro he bondho. Shonchar koro shokol korme shanto tomar chhondo. Choronopodde momo chito nishpondito koro he. Nondito koro, nondito koro, nondito koro he.

    मुझे सबके साथ जोड़ दो, मेरे बंधन खोल दो। मेरे हर काम में तुम्हारी शांत लय बहे। मेरे चित्त को अपने चरण-कमलों में स्थिर कर दो। मुझे आनंदित करो, आनंदित करो, आनंदित करो।