बगलामुखी चालीसा
Bagalamukhi Chalisa
नमो महाविद्या वरदा, बगलामुखी दयाल।
स्तम्भन क्षण में करे, सुमिरत अरिकुल काल॥Namo Mahavidya varada, Bagalamukhi dayal. Stambhan kshan mein kare, sumirat arikul kaal.
वर देने वाली महाविद्या, दयालु बगलामुखी को नमन। स्मरण करते ही वे क्षण भर में शत्रुओं को स्तंभित कर देती हैं और शत्रु-कुल के लिए काल हैं।
नमो नमो पीताम्बरा भवानी।
बगलामुखी नमो कल्याणी॥Namo namo Pitambara Bhavani. Bagalamukhi namo Kalyani.
पीले वस्त्र धारण करने वाली भवानी को बार-बार नमन। कल्याण करने वाली बगलामुखी को नमन।
भक्तवत्सला शत्रु नशानी।
नमो महाविद्या वरदानी॥Bhaktavatsala shatru nashani. Namo Mahavidya vardani.
भक्तों पर स्नेह रखने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली, वरदायिनी महाविद्या को नमन।
अमृत सागर बीच तुम्हारा।
रत्न जड़ित मणि मंडित प्यारा॥Amrit sagar beech tumhara. Ratna jadit mani mandit pyara.
अमृत के सागर के बीच आपका रत्न-जड़ित, मणियों से सजा प्यारा धाम है।
स्वर्ण सिंहासन पर आसीना।
पीताम्बर अति दिव्य नवीना॥Swarn sinhasan par aasina. Pitambar ati divya navina.
आप सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं और अत्यंत दिव्य, नए पीले वस्त्र पहने हैं।
स्वर्णाभूषण सुन्दर धारे।
सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे॥Swarnabhooshan sundar dhare. Sir par chandra mukut shringare.
आप सुंदर सोने के आभूषण पहने हैं और सिर पर चंद्रमा वाला मुकुट सजा है।
तीन नेत्र दो भुजा मृणाला।
धारे मुद्गर पाश कराला॥Teen netra do bhuja mrinala. Dhare mudgar pash karala.
आपके तीन नेत्र और कमल-नाल जैसी दो भुजाएँ हैं, जिनमें आप भयंकर मुद्गर और पाश धारण करती हैं।
भैरव करें सदा सेवकाई।
सिद्ध काम सब विघ्न नसाई॥Bhairav karen sada sevkai. Siddh kaam sab vighna nasai.
भैरव सदा आपकी सेवा करते हैं। आप सब काम सिद्ध करती हैं और सारे विघ्न नष्ट करती हैं।
तुम हताश का निपट सहारा।
करें अकिंचन अरिकुल धारा॥Tum hatash ka nipat sahara. Karen akinchan arikul dhara.
आप निराश लोगों का एकमात्र सहारा हैं और शत्रुओं के समूह को शक्तिहीन कर देती हैं।
तुम काली तारा भुवनेशी।
त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी॥Tum Kali Tara Bhuvaneshi. Tripur Sundari Bhairavi veshi.
आप ही काली, तारा और भुवनेश्वरी हैं; आप त्रिपुरसुंदरी और भैरवी का रूप धारण करती हैं।
छिन्नभाल धूमा मातंगी।
गायत्री तुम बगला रंगी॥Chhinnabhal Dhooma Matangi. Gayatri tum Bagala rangi.
आप छिन्नमस्ता, धूमावती और मातंगी हैं; आप गायत्री हैं और बगला रूप में भी हैं।
सकल शक्तियाँ तुम में साजें।
ह्रीं बीज के बीज बिराजें॥Sakal shaktiyan tum mein sajen. Hreem beej ke beej birajen.
सारी शक्तियाँ आपमें समाई हैं, और आप ह्रीं बीज के मूल में विराजती हैं।
दुष्ट स्तम्भन अरिकुल कीलन।
मारण वशीकरण सम्मोहन॥Dusht stambhan arikul keelan. Maran vashikaran sammohan.
आप दुष्टों को स्तंभित करती हैं, शत्रु-कुल को कील देती हैं, और मारण, वशीकरण व सम्मोहन की शक्ति रखती हैं।
दुष्टोच्चाटन कारक माता।
अरि जिह्वा कीलक सघाता॥Dushtochchatan karak mata. Ari jihva keelak saghata.
हे माता, आप दुष्टों का उच्चाटन करती हैं और प्रहार करके शत्रु की जीभ कील देती हैं।
साधक के विपति की त्राता।
नमो महामाया प्रख्याता॥Sadhak ke vipati ki trata. Namo Mahamaya prakhyata.
आप साधक को विपत्ति से बचाती हैं। प्रसिद्ध महामाया को नमन।
मुद्गर शिला लिए अति भारी।
प्रेतासन पर किए सवारी॥Mudgar shila liye ati bhari. Pretasan par kiye savari.
आप अत्यंत भारी पत्थर का मुद्गर लिए प्रेत के आसन पर सवार हैं।
तीन लोक दस दिशा भवानी।
बिचरहु तुम हित कल्याणी॥Teen lok das disha Bhavani. Bicharahu tum hit Kalyani.
हे कल्याणी भवानी, आप सबके हित के लिए तीनों लोकों और दसों दिशाओं में विचरती हैं।
अरि अरिष्ट सोचे जो जन को।
बुद्धि नाश कर कीलक तन को॥Ari arisht soche jo jan ko. Buddhi nash kar keelak tan ko.
यदि कोई शत्रु भक्त का अनिष्ट सोचे, तो आप उसकी बुद्धि नष्ट करके उसके शरीर को कील देती हैं।
हाथ पाँव बाँधहु तुम ताके।
हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके॥Haath paanv bandhahu tum take. Hanahu jeebh bich mudgar bake.
आप उसके हाथ-पाँव बाँध देती हैं और अपने मुद्गर से उसकी जीभ पर प्रहार करती हैं।
चोरों का जब संकट आवे।
रण में रिपुओं से घिर जावे॥Choron ka jab sankat aave. Ran mein ripuon se ghir jave.
जब चोरों का संकट आए, या कोई युद्ध में शत्रुओं से घिर जाए,
अनल अनिल विप्लव घहरावे।
वाद विवाद न निर्णय पावे॥Anal anil viplav ghaharave. Vaad vivad na nirnay pave.
जब आग, आँधी या उपद्रव घिर आए, या वाद-विवाद का निर्णय न हो,
मूठ आदि अभिचारण संकट।
राजभीति आपत्ति सन्निकट॥Mooth aadi abhicharan sankat. Rajbheeti aapatti sannikat.
जब मूठ आदि टोने-टोटके का संकट हो, या राजभय और आपत्ति पास हो,
ध्यान करत सब कष्ट नसावे।
भूत प्रेत न बाधा आवे॥Dhyan karat sab kasht nasave. Bhoot pret na badha aave.
तब आपका ध्यान करने से सारे कष्ट मिट जाते हैं और भूत-प्रेत की बाधा नहीं आती।
सुमिरत राजद्वार बँध जावे।
सभा बीच स्तम्भन छावे॥Sumirat rajdvar bandh jave. Sabha beech stambhan chhave.
आपका स्मरण करने से राजदरबार भी बँध जाता है और सभा में स्तंभन छा जाता है।
नाग सर्प बिच्छू आदि भयंकर।
खल विहंग भागहिं सब सत्वर॥Naag sarp bichchhu aadi bhayankar. Khal vihang bhagahin sab satvar.
भयंकर नाग, साँप, बिच्छू, दुष्ट लोग और हिंसक पक्षी सब तुरंत भाग जाते हैं।
सर्व रोग की नाशनहारी।
अरिकुल मूलोच्चाटन कारी॥Sarv rog ki nashanhari. Arikul moolochchatan kari.
आप सब रोगों का नाश करती हैं और शत्रु-कुल को जड़ से उखाड़ देती हैं।
स्त्री पुरुष राज सम्मोहक।
नमो नमो पीताम्बर सोहक॥Stri purush raj sammohak. Namo namo pitambar sohak.
आप स्त्री, पुरुष और राजा सबको मोहित करती हैं। पीले वस्त्रों में शोभित माँ को बार-बार नमन।
तुमको सदा कुबेर मनावे।
श्री समृद्धि सुयश नित गावें॥Tumko sada Kuber manave. Shri samriddhi suyash nit gaven.
कुबेर सदा आपको मनाते हैं, और श्री व समृद्धि नित्य आपका यश गाती हैं।
शक्ति शौर्य की तुम्हीं विधाता।
दुःख दारिद्र विनाशक माता॥Shakti shaurya ki tumhin vidhata. Dukh daridra vinashak mata.
शक्ति और शौर्य की दाता आप ही हैं; हे माता, आप दुख और दरिद्रता का नाश करती हैं।
यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता।
शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता॥Yash aishvarya siddhi ki data. Shatru nashini vijay pradata.
आप यश, ऐश्वर्य और सिद्धि देती हैं; शत्रुओं का नाश करके विजय दिलाती हैं।
पीताम्बरा नमो कल्याणी।
नमो माता बगला महारानी॥Pitambara namo Kalyani. Namo mata Bagala Maharani.
पीताम्बरा कल्याणी को नमन। माता बगला महारानी को नमन।
जो तुमको सुमिरै चितलाई।
योग क्षेम से करो सहाई॥Jo tumko sumirai chit lai. Yog kshem se karo sahai.
जो मन लगाकर आपका स्मरण करता है, आप उसकी ज़रूरतें पूरी करके और उसकी रक्षा करके सहायता करती हैं।
आपत्ति जन की तुरत निवारो।
आधि व्याधि संकट सब टारो॥Aapatti jan ki turat nivaro. Aadhi vyadhi sankat sab taro.
भक्त की आपत्ति तुरंत दूर कीजिए और सारी चिंता, रोग और संकट टाल दीजिए।
पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी।
अर्थ न आखर करहुँ निहोरी॥Pooja vidhi nahin janat tumhari. Arth na aakhar karahun nihori.
मैं आपकी पूजा-विधि नहीं जानता, न अक्षर, न उनका अर्थ; मैं बस आपसे विनती करता हूँ।
मैं कुपुत्र अति निवल उपाया।
हाथ जोड़ शरणागत आया॥Main kuputra ati nival upaya. Haath jod sharanagat aaya.
मैं कुपुत्र हूँ और मेरे पास कोई उपाय नहीं; हाथ जोड़कर आपकी शरण में आया हूँ।
जग में केवल तुम्हीं सहारा।
सारे संकट करहुँ निवारा॥Jag mein keval tumhin sahara. Sare sankat karahun nivara.
जगत में केवल आप ही मेरा सहारा हैं; मेरे सारे संकट दूर कीजिए।
नमो महादेवी हे माता।
पीताम्बरा नमो सुखदाता॥Namo Mahadevi he mata. Pitambara namo sukhdata.
हे माता महादेवी, आपको नमन। सुख देने वाली पीताम्बरा को नमन।
सौम्य रूप धर बनती माता।
सुख सम्पत्ति सुयश की दाता॥Saumya roop dhar banti mata. Sukh sampatti suyash ki data.
सौम्य रूप धारण करके आप माता बनती हैं और सुख, संपत्ति व सुयश देती हैं।
रौद्र रूप धर शत्रु संहारो।
अरि जिह्वा में मुद्गर मारो॥Raudra roop dhar shatru sanharo. Ari jihva mein mudgar maro.
रौद्र रूप धारण करके शत्रुओं का संहार कीजिए और शत्रु की जीभ पर मुद्गर मारिए।
नमो महाविद्या आगारा।
आदि शक्ति सुन्दरी अपारा॥Namo Mahavidya aagara. Aadi shakti sundari apara.
महाविद्या की भंडार, अपार सुंदरी आदिशक्ति को नमन।
अरि भंजक विपत्ति की त्राता।
दया करो पीताम्बरी माता॥Ari bhanjak vipatti ki trata. Daya karo Pitambari mata.
हे शत्रुओं का नाश करने वाली, विपत्ति से बचाने वाली पीताम्बरी माता, दया कीजिए।
रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।
मेरी सब बाधा हरो, माँ बगले तत्काल॥Riddhi siddhi data tumhin, ari samool kul kaal. Meri sab badha haro, Maan Bagale tatkal.
ऋद्धि-सिद्धि देने वाली आप ही हैं और शत्रु-कुल को जड़ से मिटाने वाली काल हैं। हे माँ बगला, मेरी सारी बाधाएँ तुरंत हर लीजिए।