हनुमान बाहुक
Hanuman Bahuk
सिंधु तरन, सिय सोच हरन, रबि बाल बरन तनु।
भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु॥ गहन दहन निरदहन लंक निःसंक, बंक भुव।
जातुधान बलवान मान मद दवन पवनसुव॥ कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित संतत निकट।
गुन गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल संकट बिकट॥Sindhu taran, Siy soch haran, rabi baal baran tanu. Bhuj bisal, moorati karal kalahu ko kaal janu. Gahan dahan nirdahan Lank nihsank, bank bhuv. Jatudhan balvan maan mad davan Pavansuv. Kah Tulsidas sevat sulabh sevak hit santat nikat. Gun ganat, namat, sumirat, japat saman sakal sankat bikat.
जिन्होंने समुद्र पार किया और सीता जी का शोक हरा, जिनका शरीर बाल-सूर्य जैसा, भुजाएँ विशाल और विकराल रूप मानो काल का भी काल है; टेढ़ी भौंहों वाले पवनपुत्र ने निःशंक होकर लंका के घने वन जलाए और बलवान राक्षसों का मान-मद चूर किया। तुलसीदास कहते हैं, वे सेवा से सहज मिलते हैं और सेवकों के हित के लिए सदा पास रहते हैं; उनके गुण गाने, प्रणाम, स्मरण और जप से सब विकट संकट मिट जाते हैं।
स्वर्न सैल संकास कोटि रबि तरुन तेज घन।
उर बिसाल, भुजदंड चंड नख बज्र, बज्रतन॥ पिंग नयन, भृकुटी कराल, रसना दसनानन।
कपिस केस, करकस लँगूर, खल दल बल भानन॥ कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति बिकट।
संताप पाप तेहि पुरुष पहिं सपनेहुँ नहिं आवत निकट॥Svarn sail sankas koti rabi tarun tej ghan. Ur bisal, bhujdand chand nakh bajra, bajratan. Ping nayan, bhrikuti karal, rasna dasnanan. Kapis kes, karkas langoor, khal dal bal bhanan. Kah Tulsidas bas jasu ur Marutsut moorati bikat. Santap paap tehi purush pahin sapnehun nahin aavat nikat.
उनका शरीर सोने के पर्वत जैसा और करोड़ों उगते सूर्यों के समान तेजस्वी है; छाती चौड़ी, भुजाएँ प्रचंड, नख वज्र जैसे और देह वज्र की है। पीली आँखें, विकराल भौंहें, भयानक जीभ और दाँत, भूरे केश और कठोर पूँछ वाले वे दुष्टों के दल का बल तोड़ते हैं। तुलसीदास कहते हैं, जिसके हृदय में पवनपुत्र की यह विकट मूर्ति बसती है, उसके पास दुःख और पाप सपने में भी नहीं आते।
पंचमुख छमुख भृगुमुख्य भट असुर सुर, सर्व सरि समर समरत्थ सूरो।
बाँकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली, बेद बंदी बदत पैजपूरो॥ जासु गुनगाथ रघुनाथ कह, जासु बल बिपुल जल भरित जग जलधि झूरो।
दुवन दल दमनको कौन तुलसीस है, पवनको पूत रजपूत रुरो॥Panchmukh chhamukh Bhrigu mukhya bhat asur sur, sarv sari samar samaratth sooro. Baankuro beer biruddait biruddavali, bed bandi badat paijpooro. Jasu gungatha Raghunath kah, jasu bal bipul jal bharit jag jaladhi jhooro. Duvan dal damanko kaun Tulsees hai, Pavanko poot Rajpoot ruro.
पंचमुख शिव, छहमुख कार्तिकेय, परशुराम जैसे योद्धाओं, असुरों और देवताओं में भी युद्ध में उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता; वे बाँके वीर हैं जिनकी कीर्ति वेद भाटों की तरह गाते हैं। स्वयं रघुनाथ उनके गुण गाते हैं और उनके बल के आगे जल से भरा संसार-सागर सूखा लगता है; तुलसी कहते हैं, शत्रु-दल का दमन करने वाला पवन के श्रेष्ठ वीर पुत्र के सिवा और कौन है?
भानुसों पढ़न हनुमान गये भानु मन, अनुमानि सिसुकेलि कियो फेरफार सो।
पाछिले पगनि गम गगन मगन मन, क्रमको न भ्रम, कपि बालक बिहार सो॥ कौतुक बिलोकि लोकपाल हरि हर बिधि, लोचननि चकाचौंधी चित्तनि खभार सो।
बल कैधौं बीररस, धीरज कै, साहस कै, तुलसी सरीर धरे सबनिको सार सो॥Bhanu son padhan Hanuman gaye Bhanu man, anumani sisukeli kiyo pherphar so. Pachhile pagani gam gagan magan man, kramko na bhram, kapi balak bihar so. Kautuk biloki lokpal Hari Har Bidhi, lochanani chakachaundhi chittani khabhar so. Bal kaidhaun beeras, dheeraj kai, sahas kai, Tulsi sareer dhare sabaniko saar so.
जब हनुमान सूर्य से पढ़ने गए, तो सूर्य ने इसे बच्चे का खेल समझकर चलना जारी रखा; तब हनुमान प्रसन्न मन से उनके सामने उल्टे पाँव आकाश में चलते रहे, बिना कोई कदम चूके, मानो खेल रहे हों। यह कौतुक देखकर लोकपाल, विष्णु, शिव और ब्रह्मा की आँखें चौंधिया गईं और वे सोचने लगे कि यह बल है, वीरता है, धैर्य है या साहस, मानो सबका सार देह धरकर आया हो।
भारतमें पारथके रथकेतु कपिराज, गाज्यो सुनि कुरुराज दल हलबल भो।
कह्यो द्रोन भीषम समीरसुत महाबीर, बीर रस बारि निधि जाको बल जल भो॥ बानर सुभाय बालकेलि भूमि भानु लागि, फलँग फलाँगहूतें घाटि नभतल भो।
नाइ नाइ माथ जोरि जोरि हाथ जोधा जोहैं, हनुमान देखे जगजीवनको फल भो॥Bharat mein Parath ke rathketu Kapiraj, gajyo suni Kururaj dal halbal bho. Kahyo Dron Bheesham Sameersut Mahabeer, beer ras baari nidhi jako bal jal bho. Banar subhay balkeli bhoomi bhanu lagi, phalang phalanghoon ten ghati nabhtal bho. Nai nai maath jori jori haath jodha johain, Hanuman dekhe jagjeevan ko phal bho.
महाभारत में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठे कपिराज ने जब गर्जना की, तो कौरव सेना में खलबली मच गई। द्रोण और भीष्म ने कहा, यही पवनपुत्र महावीर हैं, जिनका बल वीर-रस के सागर का जल है; बचपन में खेल-खेल में वे धरती से सूर्य तक कूद गए और आकाश उनकी एक छलाँग से भी छोटा पड़ गया। योद्धा सिर झुका-झुकाकर और हाथ जोड़-जोड़कर उन्हें देखते रहे; हनुमान को देखना ही जीवन का फल था।
गोपद पयोधि करि, होलिका ज्यों लाई लंक, निपट निसंक परपुर गलबल भो।
द्रोन सो पहार लियो ख्याल ही उखारि कर, कंदुक ज्यों कपि खेल बेल कैसो फल भो॥ संकटसमाज असमंजस भो रामराज, काज जुग पूगनिको करतल पल भो।
साहसी समत्थ तुलसीको नाह जाकी बाँह, लोकपाल पालनको फिर थिर थल भो॥Gopad payodhi kari, holika jyon laai Lank, nipat nisank parpur galbal bho. Dron so pahar liyo khyal hi ukhari kar, kanduk jyon kapi khel bel kaiso phal bho. Sankat samaj asmanjas bho Ramraj, kaaj jug poogni ko kartal pal bho. Sahasi samatth Tulsi ko naah jaki baanh, lokpal palan ko phir thir thal bho.
उन्होंने समुद्र को गाय के खुर के गड्ढे जैसा पार किया, लंका को होली की तरह जला दिया और निःशंक होकर शत्रु-नगर में हाहाकार मचा दिया; द्रोण पर्वत को ऐसे उखाड़ लाए जैसे बंदर खेल में गेंद या बेल का फल उठा लेता है। जब राम-काज संकट और दुविधा में पड़ा, तब युगों का काम उनकी हथेली पर पल भर में हो गया; तुलसी के साहसी और समर्थ स्वामी वही हैं, जिनकी बाँह लोकपालों के लिए फिर से स्थिर आधार बन गई।
कमठकी पीठि जाके गोड़निकी गाड़ैं मानो, नापके भाजन भरि जलनिधि जल भो।
जातुधान दावन परावनको दुर्ग भयो, महामीनबास तिमि तोमनिको थल भो॥ कुंभकरन रावन पयोदनाद ईंधनको, तुलसी प्रताप जाको प्रबल अनल भो।
भीषम कहत मेरे अनुमान हनुमान, सारिखो त्रिकाल न त्रिलोक महाबल भो॥Kamath ki peethi jake godani ki gaadain mano, naap ke bhajan bhari jalnidhi jal bho. Jatudhan davan paravan ko durg bhayo, mahameen baas timi tomani ko thal bho. Kumbhkaran Ravan payodnaad eendhan ko, Tulsi pratap jako prabal anal bho. Bheesham kahat mere anuman Hanuman, sarikho trikal na trilok mahabal bho.
छलाँग लगाते समय उनके पैरों से कच्छप की पीठ पर जो गड्ढे पड़े, उनमें भरा समुद्र का जल नापने के बर्तनों जैसा लगा; वे गड्ढे भागते राक्षसों के लिए किला और बड़ी मछलियों व तिमिंगलों का घर बन गए। तुलसी कहते हैं, कुंभकर्ण, रावण और मेघनाद रूपी ईंधन के लिए उनका प्रताप प्रचंड अग्नि बन गया; भीष्म कहते हैं, मेरे विचार में हनुमान जैसा महाबली तीनों कालों और तीनों लोकों में कोई नहीं हुआ।
दूत रामरायको, सपूत पूत पौनको, तू अंजनीको नंदन प्रताप भूरि भानु सो।
सीय सोच समन, दुरित दोष दमन, सरन आये अवन, लखन प्रिय प्रान सो॥ दसमुख दुसह दरिद्र दरिबेको भयो, प्रकट तिलोक ओक तुलसी निधान सो।
ज्ञान गुनवान बलवान सेवा सावधान, साहेब सुजान उर आनु हनुमान सो॥Doot Ramray ko, sapoot poot paun ko, too Anjani ko nandan pratap bhoori bhanu so. Seey soch saman, durit dosh daman, saran aaye avan, Lakhan priy pran so. Dasmukh dusah daridra daribe ko bhayo, prakat tilok ok Tulsi nidhan so. Gyan gunvan balvan seva savdhan, saheb sujan ur aanu Hanuman so.
तुम राजा राम के दूत, पवन के सुपुत्र और अंजनी के नंदन हो, जिनका प्रताप सूर्य जैसा है; तुम सीता का शोक मिटाने वाले, पाप और दोष का दमन करने वाले, शरणागत के रक्षक और लक्ष्मण को प्राणों जैसे प्रिय हो। रावण रूपी असह्य दरिद्रता को नष्ट करने के लिए तुम तीनों लोकों में प्रकट हुए, तुलसी के लिए खजाने जैसे; हे मन, ज्ञानी, गुणवान, बलवान, सेवा में सावधान और सुजान स्वामी हनुमान को हृदय में बसा।
दवन दुवन दल भुवन बिदित बल, बेद जस गावत बिबुध बंदीछोरको।
पाप ताप तिमिर तुहिन बिघटन पटु, सेवक सरोरुह सुखद भानु भोरको॥ लोक परलोकतें बिसोक सपने न सोक, तुलसीके हिये है भरोसो एक ओरको।
रामको दुलारो दास बामदेवको निवास, नाम कलि कामतरु केसरीकिसोरको॥Davan duvan dal bhuvan bidit bal, bed jas gavat bibudh bandichhorko. Paap taap timir tuhin bighatan patu, sevak saroruh sukhad bhanu bhorko. Lok parlok ten bisok sapne na sok, Tulsi ke hiye hai bharoso ek orko. Ramko dularo daas Bamdevko nivas, naam kali kamtaru Kesarikishorko.
शत्रु-दल का दमन करने वाला उनका बल सारे लोकों में प्रसिद्ध है, और वेद व देवता देवताओं को बंधन से छुड़ाने वाले का यश गाते हैं; जैसे सुबह का सूर्य पाले और अंधकार को मिटाकर कमलों को सुख देता है, वैसे ही वे पाप और ताप हरकर सेवकों को सुख देते हैं। तुलसी के हृदय में केवल उन्हीं का भरोसा है, इसलिए उसे लोक-परलोक में सपने में भी शोक नहीं; राम के दुलारे दास और शिव के निवास केसरीनंदन का नाम कलियुग में कल्पवृक्ष है।
महाबल सीम, महाभीम, महाबानइत, महाबीर बिदित बरायो रघुबीरको।
कुलिस कठोर तनु जोर परै रोर रन, करुना कलित मन धारमिक धीरको॥ दुर्जनको कालसो कराल पाल सज्जनको, सुमिरे हरनहार तुलसीकी पीरको।
सीय सुखदायक दुलारो रघुनायकको, सेवक सहायक है साहसी समीरको॥Mahabal seem, Mahabheem, Mahabanait, Mahabeer bidit barayo Raghubeerko. Kulis kathor tanu jor parai ror ran, karuna kalit man dharmik dheerko. Durjan ko kaal so karal paal sajjanko, sumire haranhar Tulsi ki peerko. Seey sukhdayak dularo Raghunayakko, sevak sahayak hai sahasi Sameerko.
वे बल की सीमा, महाभयंकर, महान योद्धा और रघुवीर द्वारा चुने गए प्रसिद्ध महावीर हैं; उनका शरीर वज्र जैसा कठोर है और जहाँ उनका बल पड़ता है वहाँ रण में कोलाहल मच जाता है, फिर भी उस धर्मात्मा धीर का मन करुणा से भरा है। वे दुष्टों के लिए काल जैसे भयानक और सज्जनों के रक्षक हैं, और स्मरण करते ही तुलसी की पीड़ा हर लेते हैं; सीता को सुख देने वाले, रघुनायक के दुलारे साहसी पवनपुत्र सेवकों के सहायक हैं।
रचिबेको बिधि जैसे, पालिबेको हरि, हर मीच मारिबेको, ज्याइबेको सुधापान भो।
धरिबेको धरनि, तरनि तम दलिबेको, सोखिबे कृसानु, पोषिबेको हिमभानु भो॥ खल दुख दोषिबेको, जन परितोषिबेको, माँगिबो मलीनताको मोदक सुदान भो।
आरतकी आरति निवारिबेको तिहूँ पुर, तुलसीको साहेब हठीलो हनुमान भो॥Rachibe ko Bidhi jaise, palibe ko Hari, Har meech maribe ko, jyaibe ko sudhapan bho. Dharibe ko dharani, tarani tam dalibe ko, sokhibe krisanu, poshibe ko himbhanu bho. Khal dukh doshibe ko, jan paritoshibe ko, maangibo maleenata ko modak sudan bho. Aarat ki aarati nivaribe ko tihoon pur, Tulsi ko saheb hatheelo Hanuman bho.
रचने में वे ब्रह्मा, पालने में विष्णु, मृत्यु को मारने में शिव और जिलाने में अमृत जैसे हैं; धारण करने में धरती, अंधकार मिटाने में सूर्य, सुखाने में अग्नि और पोषण में चंद्रमा जैसे हैं। वे दुष्टों को दंड देने और भक्तों को संतुष्ट करने वाले हैं, और जिनका माँगना भी लज्जा भरा हो उनके लिए लड्डुओं का उदार दान हैं; तीनों लोकों में दुखियों का दुःख मिटाने के लिए तुलसी के हठीले स्वामी हनुमान प्रकट हुए हैं।
सेवक स्योकाई जानि जानकीस मानै कानि, सानुकूल सूलपानि नवै नाथ नाँकको।
देवी देव दानव दयावने ह्वै जोरैं हाथ, बापुरे बराक कहा और राजा राँकको॥ जागत सोवत बैठे बागत बिनोद मोद, ताकै जो अनर्थ सो समर्थ एक आँकको।
सब दिन रुरो परै पूरो जहाँ तहाँ ताहि, जाके है भरोसो हिये हनुमान हाँकको॥Sevak syokai jani Jankees manai kani, sanukool Soolpani navai naath naankko. Devi dev danav dayavane hvai jorain haath, bapure barak kaha aur raja raankko. Jagat sovat baithe bagat binod mod, takai jo anarth so samarth ek aankko. Sab din ruro parai pooro jahan tahan tahi, jake hai bharoso hiye Hanuman haankko.
उनकी सेवा को जानकर जानकीनाथ उनका मान रखते हैं, शिव अनुकूल रहते हैं और स्वर्ग के स्वामी इंद्र झुकते हैं; देवी, देवता और दानव भी विनम्र होकर हाथ जोड़ते हैं, फिर बेचारे राजा और रंक की क्या बात। जिसके हृदय में हनुमान की हाँक का भरोसा है, वह जागते, सोते, बैठते, घूमते आनंद में रहता है; जो उसका अनिष्ट चाहे उसके सामने एकमात्र समर्थ हनुमान हैं, और उसके सब दिन जहाँ-तहाँ अच्छे बीतते हैं।
सानुग सगौरि सानुकूल सूलपानि ताहि, लोकपाल सकल लखन राम जानकी।
लोक परलोकको बिसोक सो तिलोक ताहि, तुलसी तमाइ कहा काहू बीर आनकी॥ केसरीकिसोर बंदीछोरके नेवाजे सब, कीरति बिमल कपि करुनानिधानकी।
बालक ज्यों पालिहैं कृपालु मुनि सिद्ध ताको, जाके हिये हुलसति हाँक हनुमानकी॥Sanug sagauri sanukool Soolpani tahi, lokpal sakal Lakhan Ram Janaki. Lok parlok ko bisok so tilok tahi, Tulsi tamai kaha kahoo beer aan ki. Kesarikishor bandichhor ke nevaje sab, keerati bimal kapi karunanidhan ki. Balak jyon palihain kripalu muni siddh tako, jake hiye hulasati haank Hanuman ki.
शिव अपने गणों और पार्वती सहित, सब लोकपाल, लक्ष्मण, राम और जानकी उस पर अनुकूल रहते हैं, और वह लोक-परलोक व तीनों लोकों में शोक-रहित रहता है; तुलसी कहते हैं, फिर किसी और वीर की आशा क्यों करें? सब बंधन छुड़ाने वाले, निर्मल कीर्ति वाले करुणानिधान केसरीनंदन की कृपा सब पाते हैं; जिसके हृदय में हनुमान की हाँक उल्लास भरती है, उसे कृपालु मुनि और सिद्ध बालक की तरह पालते हैं।
करुनानिधान, बलबुद्धिके निधान, मोद महिमानिधान, गुन ज्ञानके निधान हौ।
बामदेव रूप, भूप रामके सनेही, नाम लेत देत अर्थ धर्म काम निरबान हौ॥ आपने प्रभाव, सीतानाथके सुभाव सील, लोक बेद बिधिके बिदुष हनुमान हौ।
मनकी, बचनकी, करमकी तिहूँ प्रकार, तुलसी तिहारो तुम साहेब सुजान हौ॥Karunanidhan, balbuddhi ke nidhan, mod mahima nidhan, gun gyan ke nidhan hau. Bamdev roop, bhoop Ram ke sanehi, naam let det arth dharm kaam nirban hau. Aapne prabhav, Sitanath ke subhav seel, lok bed bidhi ke bidush Hanuman hau. Man ki, bachan ki, karam ki tihoon prakar, Tulsi tiharo tum saheb sujan hau.
तुम करुणा, बल, बुद्धि, आनंद, महिमा, गुण और ज्ञान के भंडार हो; तुम शिव-रूप हो, राजा राम के प्रिय हो, और तुम्हारा नाम लेने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष मिलते हैं। हे हनुमान, अपने प्रभाव और सीतानाथ के कोमल स्वभाव से तुम लोक और वेद की रीति के ज्ञाता हो; तुलसी मन, वचन और कर्म तीनों से तुम्हारा है और तुम उसके सुजान स्वामी हो।
मनको अगम, तन सुगम किये कपीस, काज महाराजके समाज साज साजे हैं।
देव बंदीछोर रनरोर केसरीकिसोर, जुग जुग जग तेरे बिरद बिराजे हैं॥ बीर बरजोर, घटि जोर तुलसीकी ओर सुनि, सकुचाने साधु, खलगन गाजे हैं।
बिगरी सँवार अंजनीकुमार कीजे मोहिं, जैसे होत आये हनुमानके निवाजे हैं॥Man ko agam, tan sugam kiye Kapees, kaaj Maharaj ke samaj saaj saaje hain. Dev bandichhor ranror Kesarikishor, jug jug jag tere birad biraje hain. Beer barjor, ghati jor Tulsi ki or suni, sakuchane sadhu, khalgan gaaje hain. Bigari sanvar Anjanikumar keeje mohin, jaise hot aaye Hanuman ke nivaje hain.
हे कपीश, जो काम मन से भी अगम था, उसे तुमने शरीर से सहज कर दिया और महाराज राम के काम के लिए सब साज सजाए; देवताओं को बंधन से छुड़ाने वाले, रण में गर्जने वाले केसरीनंदन, युग-युग से जग में तुम्हारी कीर्ति शोभित है। हे बलवान वीर, तुलसी का बल घटा सुनकर साधु सकुचा गए हैं और दुष्ट गरज रहे हैं; हे अंजनीकुमार, मेरी बिगड़ी सँवार दो, जैसे हनुमान के कृपापात्रों की सदा सँवरती आई है।
जानसिरोमनि हौ हनुमान सदा जनके मन बास तिहारो।
ढारो बिगारो मैं काको कहा केहि कारन खीझत हौं तो तिहारो॥ साहेब सेवक नाते तें हातो कियो सो तहाँ तुलसीको न चारो।
दोष सुनाये तें आगेहुँको होसियार ह्वै हों मन तौ हिय हारो॥Jan siromani hau Hanuman sada jan ke man baas tiharo. Dharo bigaro main kako kaha kehi karan kheejhat haun to tiharo. Saheb sevak naate ten haato kiyo so tahan Tulsi ko na charo. Dosh sunaye ten aagehun ko hosiyar hvai haun man tau hiy haro.
हे हनुमान, तुम ज्ञानियों के शिरोमणि हो और सदा भक्तों के मन में बसते हो; मैंने किसका क्या बिगाड़ा है कि तुम अपने ही सेवक पर खीझ रहे हो? यदि तुमने स्वामी-सेवक का नाता तोड़ दिया है तो तुलसी का कोई उपाय नहीं; मेरे दोष बता दो तो आगे से सावधान रहूँगा, मेरा मन तो हिम्मत हार चुका है।
तेरे थपे उथपै न महेस, थपै थिरको कपि जे घर घाले।
तेरे निवाजे गरीबनिवाज बिराजत बैरिनके उर साले॥ संकट सोच सबै तुलसी लिये नाम फटै मकरीके से जाले।
बूढ़ भये बलि, मेरिहि बार, कि हारि परे बहुतै नत पाले॥Tere thape uthapai na Mahes, thapai thir ko kapi je ghar ghale. Tere nivaje Gareebnivaj birajat bairin ke ur sale. Sankat soch sabai Tulsi liye naam phatai makari ke se jale. Boodh bhaye bali, merihi baar, ki haari pare bahutai nat pale.
तुम्हारे बसाए को शिव भी नहीं उजाड़ सकते, और तुम्हारे उजाड़े घर को कोई फिर नहीं बसा सकता; हे गरीबनिवाज, तुम्हारे कृपापात्र शत्रुओं के हृदय में काँटे की तरह खटकते हुए फलते-फूलते हैं। तुम्हारा नाम लेते ही तुलसी के सब संकट और सोच मकड़ी के जाले की तरह फट जाते थे; क्या मेरी बारी पर ही तुम बूढ़े हो गए, या बहुत से शरणागतों को पालते-पालते थक गए?
सिंधु तरे, बड़े बीर दले खल, जारे हैं लंकसे बंक मवासे।
तैं रन केहरि केहरिके बिदले अरि कुंजर छैल छवा से॥ तोसों समत्थ सुसाहेब सेइ सहै तुलसी दुख दोष दवा से।
बानर बाज, बढ़े खल खेचर, लीजत क्यों न लपेटि लवा से॥Sindhu tare, bade beer dale khal, jare hain Lank se bank mavase. Tain ran kehari keharike bidale ari kunjar chhail chhava se. Toson samatth susaheb sei sahai Tulsi dukh dosh dava se. Banar baaj, badhe khal khechar, leejat kyon na lapeti lava se.
तुमने समुद्र पार किया, बड़े-बड़े दुष्ट वीरों को कुचला और लंका जैसे मजबूत गढ़ जला डाले; रण में सिंह बनकर तुमने शत्रु रूपी हाथियों को सिंह-शावक की तरह चीर डाला। तुम जैसे समर्थ स्वामी की सेवा करके भी तुलसी दावानल जैसे दुःख और दोष क्यों सहे? तुम बंदरों में बाज हो, फिर इन बढ़े हुए दुष्ट पक्षियों को बटेर की तरह क्यों नहीं दबोच लेते?
अच्छ बिमर्दन कानन भानि दसानन आनन भा न निहारो।
बारिदनाद अकंपन कुंभकरन से कुंजर केहरि बारो॥ राम प्रताप हुतासन, कच्छ बिपच्छ, समीर समीर दुलारो।
पापतें, सापतें, ताप तिहूँतें सदा तुलसी कहँ सो रखवारो॥Achchh bimardan kanan bhani Dasanan aanan bha na niharo. Baridnad Akampan Kumbhkaran se kunjar kehari baro. Ram pratap hutasan, kachchh bipachchh, sameer Sameer dularo. Paap ten, saap ten, taap tihoon ten sada Tulsi kahan so rakhvaro.
तुमने अक्षयकुमार को मारा और अशोक वाटिका उजाड़ी, और देखते-देखते रावण का मुख फीका पड़ गया; मेघनाद, अकंपन और कुंभकर्ण जैसे हाथियों के लिए तुम युवा सिंह हो। राम का प्रताप अग्नि है, शत्रु सूखी घास हैं और पवन के दुलारे तुम उस आग को भड़काने वाली हवा हो; पाप, शाप और तीनों तापों से तुम ही सदा तुलसी के रखवाले हो।
जानत जहान हनुमानकौ निवाज्यौ जन, मन अनुमानि, बलि, बोल न बिसारियै।
सेवा जोग तुलसी कबहुँ कहा चूक परी, साहेब सुभाव कपि साहिबी सँभारिये॥ अपराधी जानि कीजै सासति सहस भाँति, मोदक मरै जो, ताहि माहुर न मारिये।
साहसी समीरके दुलारे रघुबीरजूके, बाँह पीर महाबीर बेगि ही निवारिये॥Janat jahan Hanuman kau nivajyau jan, man anumani, bali, bol na bisariyai. Seva jog Tulsi kabahun kaha chook pari, saheb subhav kapi sahibi sanbhariye. Apradhi jani keejai sasati sahas bhanti, modak marai jo, tahi mahur na mariye. Sahasi Sameer ke dulare Raghubeer joo ke, baanh peer Mahabeer begi hi nivariye.
संसार जानता है कि मैं हनुमान का कृपापात्र हूँ; मन में विचार करो, बलि जाऊँ, अपना वचन मत भूलो। तुलसी से सेवा में कभी क्या चूक हुई? हे स्वामी, अपने स्वभाव और स्वामित्व को सँभालो। अपराधी मानो तो हज़ार तरह से दंड दो, पर जो लड्डू से मर जाए उसे विष देकर मत मारो; हे साहसी पवनपुत्र, रघुवीर के दुलारे महावीर, मेरी बाँह की पीड़ा जल्दी दूर करो।
बालक बिलोकि, बलि, बारेतें आपनो कियो, दीनबंधु दया कीन्ही निरुपाधि न्यारिये।
रावरो भरोसो तुलसीके, रावरोई बल, आस रावरीयै, दास रावरो बिचारिये॥ बड़ो बिकराल कलि, काको न बिहाल कियो, माथे पगु बलीको, निहारि सो निवारिये।
केसरीकिसोर, रनरोर, बरजोर बीर, बाँहुपीर राहुमातु ज्यौं पछारि मारिये॥Balak biloki, bali, bare ten aapno kiyo, Deenbandhu daya keenhi nirupadhi nyariye. Raavro bharoso Tulsi ke, raavroi bal, aas raavriyai, daas raavro bichariye. Bado bikral Kali, kako na bihal kiyo, maathe pagu Bali ko, nihari so nivariye. Kesarikishor, ranror, barjor beer, baanhupeer Rahumatu jyaun pachhari mariye.
मुझे बालक देखकर तुमने बचपन से ही अपना बना लिया, हे दीनबंधु, और निःस्वार्थ, अनोखी दया की; तुलसी को तुम्हारा ही भरोसा, तुम्हारा ही बल और तुम्हारी ही आस है, इसलिए उसे अपना दास समझो। भयंकर कलियुग ने किसे बेहाल नहीं किया, उसने मेरे माथे पर पैर रखा है, यह देखकर उसे हटाओ; हे केसरीनंदन, रण में गर्जने वाले बलवान वीर, इस बाँह की पीड़ा को राहु की माता सिंहिका की तरह पछाड़कर मार डालो।
उथपे थपनथिर थपे उथपनहार, केसरीकुमार बल आपनो सँभारिये।
रामके गुलामनिको कामतरु रामदूत, मोसे दीन दूबरेको तकिया तिहारिये॥ साहेब समर्थ तोसों तुलसीके माथेपर, सोऊ अपराध बिनु बीर, बाँधि मारिये।
पोखरी बिसाल बाँहु, बलि, बारिचर पीर, मकरी ज्यौं पकरिकै बदन बिदारिये॥Uthape thapanthir thape uthapanhar, Kesarikumar bal aapno sanbhariye. Ram ke gulamani ko kamtaru Ramdoot, mose deen doobre ko takiya tihariye. Saheb samarth toson Tulsi ke maathe par, sou apradh binu beer, baandhi mariye. Pokhari bisal baanhu, bali, barichar peer, makari jyaun pakari kai badan bidariye.
तुम उजड़े को स्थिरता से बसाने वाले और बसे को उजाड़ने वाले हो; हे केसरीकुमार, अपना बल सँभालो। हे रामदूत, तुम राम के सेवकों के लिए कल्पवृक्ष हो और मुझ जैसे दीन-दुर्बल का एकमात्र सहारा हो। तुम जैसे समर्थ स्वामी के रहते यह पीड़ा बिना अपराध के तुलसी को बाँधकर मार रही है; मेरी बाँह विशाल पोखर है और पीड़ा उसका जलचर, उसे मकरी की तरह पकड़कर चीर डालो।
रामको सनेह, राम साहस, लखन सिय रामकी भगति, सोच संकट निवारिये।
मुद मरकट रोग बारिनिधि हेरि हारे, जीव जामवंतको भरोसो तेरो भारिये॥ कूदिये कृपाल तुलसी सुप्रेम पब्बयतें, सुथल सुबेल भालु बैठिकै बिचारिये।
महाबीर बाँकुरे बराकी बाँहपीर क्यों न, लंकिनी ज्यों लातघात ही मरोरि मारिये॥Ram ko saneh, Ram sahas, Lakhan Siy Ram ki bhagati, soch sankat nivariye. Mud markat rog barinidhi heri hare, jeev Jamvant ko bharoso tero bhariye. Koodiye kripal Tulsi suprem pabbay ten, suthal Subel bhalu baithi kai bichariye. Mahabeer baankure baraki baanhpeer kyon na, Lankini jyon laatghat hi marori mariye.
तुम में राम का स्नेह, राम का साहस और लक्ष्मण, सीता व राम की भक्ति है; मेरा सोच और संकट दूर करो। मेरे मन रूपी प्रसन्न बंदर रोग के सागर को देखकर हार गए हैं, और मेरा जीव जाम्बवान की तरह पूरा भरोसा तुम पर रखता है; हे कृपालु, तुलसी के प्रेम रूपी पर्वत से कूदो और भालुओं की तरह सुबेल पर बैठकर विचार करो। हे बाँके महावीर, इस नीच बाँह-पीड़ा को लंकिनी की तरह एक लात से मरोड़कर क्यों नहीं मार देते?
लोक परलोकहुँ तिलोक न बिलोकियत, तोसे समरथ चष चारिहूँ निहारिये।
कर्म, काल, लोकपाल, अग जग जीवजाल, नाथ हाथ सब निज महिमा बिचारिये॥ खास दास रावरो, निवास तेरो तासु उर, तुलसी सो देव दुखी देखिअत भारिये।
बात तरुमूल बाँहुसूल कपिकच्छु बेलि, उपजी सकेलि कपिकेलि ही उखारिये॥Lok parlokahun tilok na bilokiyat, tose samrath chash charihoon nihariye. Karm, kaal, lokpal, ag jag jeevjal, Naath haath sab nij mahima bichariye. Khaas daas raavro, nivas tero tasu ur, Tulsi so dev dukhi dekhiat bhariye. Baat tarumool baanhusool kapikachchhu beli, upaji sakeli kapikeli hi ukhariye.
चारों आँखों से देख लो, लोक, परलोक और तीनों लोकों में तुम जैसा समर्थ कोई नहीं दिखता; कर्म, काल, लोकपाल और सब चर-अचर जीव तुम्हारे हाथ में हैं, हे नाथ, अपनी महिमा का विचार करो। तुलसी तुम्हारा खास दास है और तुम उसके हृदय में बसते हो, फिर भी वह बहुत दुखी दिख रहा है; यह बाँह की पीड़ा वात रूपी पेड़ की जड़ में उगी केवाँच की बेल है, इसे बंदर के खेल की तरह उखाड़ फेंको।
करम कराल कंस भूमिपालके भरोसे, बकी बकभगिनी काहूतें कहा डरैगी।
बड़ी बिकराल बालघातिनी न जात कहि, बाँहुबल बालक छबीले छोटे छरैगी॥ आई है बनाइ बेष आप ही बिचारि देख, पाप जाय सबको गुनीके पाले परैगी।
पूतना पिसाचिनी ज्यौं कपिकान्ह तुलसीकी, बाँहपीर महाबीर, तेरे मारे मरैगी॥Karam karal Kans bhoomipal ke bharose, baki Bakbhagini kahoo ten kaha dareigi. Badi bikral balghatini na jaat kahi, baanhubal balak chhabile chhote chhareigi. Aai hai banai bes aap hi bichari dekh, paap jaay sabko guni ke pale pareigi. Pootna pisachini jyaun Kapikanh Tulsi ki, baanhpeer Mahabeer, tere mare mareigi.
जैसे बकासुर की बहन दुष्ट पूतना राजा कंस के भरोसे किसी से नहीं डरती थी, वैसे ही क्रूर कर्म के भरोसे यह पीड़ा किससे डरेगी? यह बड़ी भयानक बाल-घातिनी भेष बदलकर आई है और छोटे सुंदर बालकों को बलपूर्वक छलेगी; विचार कर देखो, गुणी के हाथ पड़ते ही सबका पाप चला जाएगा। हे महावीर, तुलसी के लिए कपि-रूप कृष्ण, जैसे पूतना कृष्ण के हाथों मरी, वैसे ही यह बाँह-पीड़ा तुम्हारे मारने से मरेगी।
भालकी कि कालकी कि रोषकी त्रिदोषकी है, बेदन बिषम पाप ताप छलछाँहकी।
करमन कूटकी कि जंत्र मंत्र बूटकी, पराहि जाहि पापिनी मलीन मनमाँहकी॥ पैहहि सजाय, नत कहत बजाय तोहि, बावरी न होहि बानि जानि कपिनाँहकी।
आन हनुमानकी दोहाई बलवानकी, सपथ महाबीरकी जो रहै पीर बाँहकी॥Bhaal ki ki kaal ki ki rosh ki tridosh ki hai, bedan bisham paap taap chhalchhanh ki. Karman koot ki ki jantra mantra boot ki, parahi jahi papini maleen man maanh ki. Paihahi sajay, nat kahat bajay tohi, bavari na hohi bani jani kapinanh ki. Aan Hanuman ki dohai balvan ki, sapath Mahabeer ki jo rahai peer baanh ki.
चाहे यह भयानक पीड़ा भाग्य की हो, काल की, किसी के क्रोध की या त्रिदोष की, पाप, ताप या छल-छाया की, या जादू-टोने और जंत्र-मंत्र की, हे मलिन मन वाली पापिन, भाग जा! तुझे सज़ा मिलेगी, मैं डंके की चोट पर कहता हूँ; पागल मत बन, कपिराज का स्वभाव जान ले। बलवान हनुमान की आन और दुहाई है, महावीर की शपथ है, बाँह की पीड़ा अब न रहे।
सिंहिका सँहारि बल, सुरसा सुधारि छल, लंकिनी पछारि मारि बाटिका उजारी है।
लंक परजारि मकरी बिदारि बार बार, जातुधान धारि धूरिधानी करि डारी है॥ तोरि जमकातरि मंदोदरी कढ़ोरि आनी, रावनकी रानी मेघनाद महतारी है।
भीर बाँहपीरकी निपट राखी महाबीर, कौनके सकोच तुलसीके सोच भारी है॥Sinhika sanhari bal, Sursa sudhari chhal, Lankini pachhari mari batika ujari hai. Lank parjari makari bidari baar baar, jatudhan dhari dhoori dhani kari dari hai. Tori Jamkatari Mandodari kadhori aani, Ravan ki rani Meghnad mahatari hai. Bheer baanhpeer ki nipat rakhi Mahabeer, kaun ke sakoch Tulsi ke soch bhari hai.
तुमने बल से सिंहिका को मारा, सुरसा के छल को सुलझाया, लंकिनी को पछाड़कर मारा और अशोक वाटिका उजाड़ी; लंका जलाई, मकरी को चीरा और बार-बार राक्षसों की सेना को धूल में मिला दिया। तुमने यम की कटार तोड़ी और रावण की रानी व मेघनाद की माता मंदोदरी को खींच लाए; हे महावीर, फिर बाँह-पीड़ा की इस भीड़ को क्यों छोड़ रखा है, किसका संकोच है, जब तुलसी इतना चिंतित है?
तेरो बालकेलि बीर सुनि सहमत धीर, भूलत सरीरसुधि सक्र रबि राहुकी।
तेरी बाँह बसत बिसोक लोकपाल सब, तेरो नाम लेत रहै आरति न काहुकी॥ साम दाम भेद बिधि बेदहू लबेद सिधि, हाथ कपिनाथहीके चोटी चोर साहुकी।
आलस अनख परिहासकै सिखावन है, एते दिन रही पीर तुलसीके बाहुकी॥Tero balkeli beer suni sahmat dheer, bhoolat sareer sudhi Sakra Rabi Rahu ki. Teri baanh basat bisok lokpal sab, tero naam let rahai aarati na kahu ki. Saam daam bhed bidhi Bedhoo labed sidhi, haath Kapinath hi ke choti chor sahu ki. Aalas anakh parihaas kai sikhavan hai, ete din rahi peer Tulsi ke bahu ki.
हे वीर, तुम्हारी बाल-लीला सुनकर धीर भी सहम जाते हैं, और इंद्र, सूर्य और राहु अपनी सुध-बुध भूल जाते हैं; तुम्हारी बाँह की छाया में सब लोकपाल शोक-रहित रहते हैं और तुम्हारा नाम लेने से किसी का दुःख नहीं रहता। साम, दाम, भेद, वैदिक और लौकिक सब सिद्धियाँ, और चोर व साहूकार का भाग्य कपिनाथ के ही हाथ में है; फिर तुलसी की बाँह की पीड़ा इतने दिन क्यों रही, यह आलस है, नाराज़गी है, हँसी है या कोई सीख?
टूकनिको घर घर डोलत कँगाल बोलि, बाल ज्यों कृपाल नतपाल पालि पोसो है।
कीन्ही है सँभार सार अंजनीकुमार बीर, आपनो बिसारिहैं न मेरेहू भरोसो है॥ इतनो परेखो सब भाँति समरथ आजु, कपिराज साँची कहौं को तिलोक तोसो है।
सासति सहत दास कीजे पेखि परिहास, चीरीको मरन खेल बालकनिको सो है॥Tookani ko ghar ghar dolat kangal boli, baal jyon kripal natpal pali poso hai. Keenhi hai sanbhar saar Anjanikumar beer, aapno bisarihain na merehoo bharoso hai. Itno parekho sab bhanti samrath aaju, Kapiraj sanchi kahaun ko tilok toso hai. Sasati sahat daas keeje pekhi parihas, cheeri ko maran khel balkani ko so hai.
मैं टुकड़ों के लिए घर-घर भटकता कंगाल था; हे शरणागत-रक्षक कृपालु, तुमने मुझे बुलाकर बालक की तरह पाला-पोसा। हे वीर अंजनीकुमार, तुमने मेरी पूरी सँभाल की है, और मुझे भरोसा है कि तुम अपने को नहीं भूलोगे; बस यही शिकायत है कि तुम आज भी सब तरह समर्थ हो, हे कपिराज, सच कहूँ तो तीनों लोकों में तुम जैसा कौन है? फिर भी तुम्हारा दास दंड सह रहा है और तुम हँसी में देख रहे हो, जैसे चिड़िया का मरना बच्चों का खेल हो।
आपने ही पापतें त्रितापतें कि सापतें, बढ़ी है बाँहबेदन कही न सहि जाति है।
औषध अनेक जंत्र मंत्र टोटकादि किये, बादि भये देवता मनाये अधिकाति है॥ करतार, भरतार, हरतार, कर्म, काल, को है जगजाल जो न मानत इताति है।
चेरो तेरो तुलसी तू मेरो कह्यो रामदूत, ढील तेरी बीर मोहि पीरतें पिराति है॥Aapne hi paap ten tritaap ten ki saap ten, badhi hai baanhbedan kahi na sahi jati hai. Aushadh anek jantra mantra totkadi kiye, baadi bhaye devta manaye adhikati hai. Kartar, bhartar, hartar, karm, kaal, ko hai jagjal jo na manat itati hai. Chero tero Tulsi too mero kahyo Ramdoot, dheel teri beer mohi peer ten pirati hai.
चाहे अपने पापों से, तीनों तापों से या किसी शाप से, बाँह की पीड़ा इतनी बढ़ गई है कि न कही जाती है न सही जाती है; अनेक दवाइयाँ, जंत्र-मंत्र और टोटके किए, सब बेकार गए, और देवताओं को मनाने से पीड़ा और बढ़ गई। सृष्टि, पालन और संहार करने वाले, कर्म और काल, संसार में कौन है जो तुम्हारी आज्ञा न माने? हे रामदूत, तुमने कहा था तुलसी मेरा सेवक है और मैं उसका; हे वीर, तुम्हारी ढील मुझे पीड़ा से भी ज़्यादा दुख देती है।
दूत रामरायको, सपूत पूत बायको, समत्थ हाथ पायको सहाय असहायको।
बाँकी बिरदावली बिदित बेद गाइयत, रावन सो भट भयो मुठिकाके घायको॥ एते बड़े साहेब समर्थको निवाजो आज, सीदत सुसेवक बचन मन कायको।
थोरी बाँहपीरकी बड़ी गलानि तुलसीको, कौन पाप कोप, लोप प्रगट प्रभायको॥Doot Ramray ko, sapoot poot Baay ko, samatth haath paay ko sahay asahay ko. Baanki birdavali bidit bed gaiyat, Ravan so bhat bhayo muthika ke ghaay ko. Ete bade saheb samarth ko nivajo aaj, seedat susevak bachan man kaay ko. Thori baanhpeer ki badi galani Tulsi ko, kaun paap kop, lop pragat prabhay ko.
तुम राजा राम के दूत, पवन के सुपुत्र, हाथ-पाँव से समर्थ और असहायों के सहायक हो; वेद तुम्हारी बाँकी कीर्ति गाते हैं, और रावण जैसा योद्धा तुम्हारे एक घूँसे से घायल हो गया। ऐसे बड़े और समर्थ स्वामी का कृपापात्र, मन, वचन और शरीर से सच्चा सेवक आज कष्ट पा रहा है; थोड़ी-सी बाँह-पीड़ा से तुलसी को बड़ी ग्लानि है कि किस पाप या क्रोध से तुम्हारा प्रकट प्रभाव छिप गया।
देवी देव दनुज मनुज मुनि सिद्ध नाग, छोटे बड़े जीव जेते चेतन अचेत हैं।
पूतना पिसाची जातुधानी जातुधान बाम, रामदूतकी रजाइ माथे मानि लेत हैं॥ घोर जंत्र मंत्र कूट कपट कुरोग जोग, हनूमान आन सुनि छाड़त निकेत हैं।
क्रोध कीजे कर्मको, प्रबोध कीजे तुलसीको, सोध कीजे तिनको जो दोष दुख देत हैं॥Devi dev danuj manuj muni siddh naag, chhote bade jeev jete chetan achet hain. Pootna pisachi jatudhani jatudhan baam, Ramdoot ki rajai maathe mani let hain. Ghor jantra mantra koot kapat kurog jog, Hanuman aan suni chhadat niket hain. Krodh keeje karm ko, prabodh keeje Tulsi ko, sodh keeje tinko jo dosh dukh det hain.
देवी, देवता, दानव, मनुष्य, मुनि, सिद्ध, नाग और जितने छोटे-बड़े, चेतन-अचेतन जीव हैं, और पूतना, पिशाचिनियाँ, राक्षसियाँ व दुष्ट राक्षस भी, सब रामदूत की आज्ञा सिर पर रखते हैं। भयानक जंत्र-मंत्र, कपट, षड्यंत्र और बुरे रोग हनुमान की आन सुनते ही अपना ठिकाना छोड़ देते हैं; मेरे कर्मों पर क्रोध करो, तुलसी को समझाओ, और जो दोष और दुःख देते हैं उनकी खबर लो।
तेरे बल बानर जिताये रन रावनसों, तेरे घाले जातुधान भये घर घरके।
तेरे बल रामराज किये सब सुरकाज, सकल समाज साज साजे रघुबरके॥ तेरो गुनगान सुनि गीरबान पुलकत, सजल बिलोचन बिरंचि हरि हरके।
तुलसीके माथेपर हाथ फेरो कीसनाथ, देखिये न दास दुखी तोसो कनिगरके॥Tere bal banar jitaye ran Ravan son, tere ghale jatudhan bhaye ghar ghar ke. Tere bal Ramraj kiye sab surkaaj, sakal samaj saaj saaje Raghubar ke. Tero gungan suni geerban pulkat, sajal bilochan Biranchi Hari Har ke. Tulsi ke maathe par haath phero Keesnath, dekhiye na daas dukhi toso kanigar ke.
तुम्हारे बल से वानरों ने रावण से युद्ध जीता, और तुम्हारे मारे राक्षस घर-घर भटकने लगे; तुम्हारे बल से राजा राम ने देवताओं के सब काम किए और रघुवर के सब साज सजे। तुम्हारा गुणगान सुनकर देवता पुलकित होते हैं और ब्रह्मा, विष्णु और शिव की आँखें भर आती हैं; हे कपिनाथ, तुलसी के माथे पर हाथ फेरो, तुम जैसे दयालु स्वामी का दास दुखी न दिखे।
पालो तेरे टूकको परेहू चूक मूकिये न, कूर कौड़ी दूको हौं आपनी ओर हेरिये।
भोरानाथ भोरे ही सरोष होत थोरे दोष, पोषि तोषि थापि आपनो न अवडेरिये॥ अंबु तू हौं अंबुचर, अंब तू हौं डिंभ, सो न बूझिये बिलंब, अवलंब मेरे तेरिये।
बालक बिकल जानि पाहि प्रेम पहिचानि, तुलसीकी बाँह पर लामी लूम फेरिये॥Palo tere took ko parehoo chook mookiye na, koor kaudi doo ko haun aapni or heriye. Bhoranath bhore hi sarosh hot thore dosh, poshi toshi thaapi aapno na avderiye. Ambu too haun ambuchar, amb too haun dimbh, so na boojhiye bilamb, avlamb mere teriye. Balak bikal jani pahi prem pahichani, Tulsi ki baanh par laami loom pheriye.
मैं तुम्हारे ही टुकड़ों पर पला हूँ, चूक हो जाए तो भी मुझे मत त्यागो; मैं दो कौड़ी का निकम्मा हूँ, पर तुम अपनी ओर देखो। हे भोलेनाथ, तुम भोलेपन में थोड़े दोष पर ही रूठ जाते हो, पर पाल-पोसकर, प्रसन्न करके और अपना बनाकर मुझे मत ठुकराओ। तुम जल हो और मैं मछली, तुम माँ हो और मैं बच्चा, इसलिए देर मत करो, मेरा सहारा तुम ही हो; बच्चे को व्याकुल जानकर, प्रेम पहचानकर रक्षा करो और तुलसी की बाँह पर अपनी लंबी पूँछ फेरो।
घेरि लियो रोगनि, कुजोगनि, कुलोगनि ज्यौं, बासर जलद घन घटा धुकि धाई है।
बरसत बारि पीर जारिये जवासे जस, रोष बिनु दोष, धूम मूल मलिनाई है॥ करुनानिधान हनुमान महाबलवान, हेरि हँसि हाँकि फूँकि फौजैं तें उड़ाई है।
खायो हुतो तुलसी कुरोग राढ़ राकसनि, केसरीकिसोर राखे बीर बरिआई है॥Gheri liyo rogani, kujogani, kulogani jyaun, basar jalad ghan ghata dhuki dhai hai. Barsat baari peer jariye javase jas, rosh binu dosh, dhoom mool malinai hai. Karunanidhan Hanuman mahabalvan, heri hansi haanki phoonki phaujain tain udai hai. Khayo huto Tulsi kurog raadh rakasani, Kesarikishor rakhe beer bariai hai.
रोगों, बुरे योगों और बुरे लोगों ने मुझे ऐसे घेर लिया है जैसे दिन में घने बादलों की घटा उमड़ आई हो; पीड़ा बरसकर मुझे वैसे जला रही है जैसे वर्षा जवासे को, यह बिना दोष के क्रोध करती है और धुएँ जैसी मैली है। हे करुणानिधान महाबलवान हनुमान, तुमने देखकर, हँसकर, हाँक लगाकर और फूँककर ऐसी सेनाएँ उड़ा दी हैं; तुलसी को बुरे रोग रूपी राक्षस खा रहे थे, हे केसरीनंदन वीर, तुमने बलपूर्वक उसकी रक्षा की है।
रामगुलाम तुही हनुमान गोसाँइ सुसाँइ सदा अनुकूलो।
पाल्यो हौं बाल ज्यों आखर दू पितु मातु सों मंगल मोद समूलो॥ बाँहकी बेदन बाँहपगार पुकारत आरत आनँद भूलो।
श्रीरघुबीर निवारिये पीर रहौं दरबार परो लटि लूलो॥Ramgulam tuhi Hanuman Gosain susain sada anukoolo. Palyo haun baal jyon aakhar doo pitu matu son mangal mod samoolo. Baanh ki bedan baanhpagar pukarat aarat aanand bhoolo. Shri Raghubeer nivariye peer rahaun darbar paro lati loolo.
हे हनुमान गोसाईं, तुम ही राम के सच्चे सेवक हो और सदा मुझ पर कृपालु अच्छे स्वामी हो; मुझे राम-नाम के दो अक्षरों ने माता-पिता की तरह पाला, जो मंगल और आनंद की जड़ हैं। बाँह की पीड़ा में मैं, आनंद भूलकर, दुखी होकर बाँहों के रक्षक तुम्हें पुकार रहा हूँ; हे श्री रघुवीर, यह पीड़ा दूर करो, भले मैं दुबला और लूला होकर तुम्हारे दरबार में पड़ा रहूँ।
कालकी करालता करम कठिनाई कीधौं, पापके प्रभावकी सुभाय बाय बावरे।
बेदन कुभाँति सो सही न जाति राति दिन, सोई बाँह गही जो गही समीरडाबरे॥ लायो तरु तुलसी तिहारो सो निहारि बारि, सींचिये मलीन भो तयो है तिहूँ तावरे।
भूतनिकी आपनी परायेकी कृपानिधान, जानियत सबहीकी रीति राम रावरे॥Kaal ki karalata karam kathinai kidhaun, paap ke prabhav ki subhay baay baavre. Bedan kubhanti so sahi na jati raati din, soi baanh gahi jo gahi Sameerdabre. Layo taru Tulsi tiharo so nihari baari, seenchiye maleen bho tayo hai tihoon taavre. Bhootani ki aapni paraye ki kripanidhan, janiyat sabahi ki reeti Ram raavre.
यह काल की कठोरता है, कर्म की कठिनाई है, पाप का प्रभाव है या वात का स्वाभाविक पागलपन? यह पीड़ा बुरी तरह दिन-रात सही नहीं जाती, और इसने वही बाँह पकड़ी है जिसे पवनपुत्र ने थामा था। तुलसी तुम्हारा लगाया हुआ पौधा है, जो तीनों तापों से झुलसकर मुरझा गया है; इसे देखकर सींचो। हे कृपानिधान राम, आप भूतों की, अपनों की और परायों की, सबकी रीति जानते हैं।
पाँयपीर पेटपीर बाँहपीर मुँहपीर, जरजर सकल सरीर पीरमई है।
देव भूत पितर करम खल काल ग्रह, मोहिपर दवरि दमानक सी दई है॥ हौं तो बिनु मोलके बिकानो बलि बारेही तें, ओट रामनामकी ललाट लिखि लई है।
कुंभजके किंकर बिकल बूड़े गोखुरनि, हाय रामराय ऐसी हाल कहूँ भई है॥Paanypeer petpeer baanhpeer munhpeer, jarjar sakal sareer peermai hai. Dev bhoot pitar karam khal kaal grah, mohi par davari damanak si dai hai. Haun to binu mol ke bikano bali bare hi ten, ot Ramnam ki lalat likhi lai hai. Kumbhaj ke kinkar bikal boode gokhurani, haay Ramray aisi haal kahoon bhai hai.
पैरों में, पेट में, बाँह में और मुँह में पीड़ा है, सारा जर्जर शरीर पीड़ा से भरा है; देवता, भूत, पितर, कर्म, दुष्ट, काल और ग्रह सब मानो मुझ पर तोपें दाग रहे हैं। मैं तो बचपन से ही बिना मोल तुम्हारे हाथ बिक गया और राम-नाम का आसरा माथे पर लिख लिया; समुद्र पीने वाले अगस्त्य का सेवक गाय के खुर भर पानी में डूब रहा है, हाय राजा राम, ऐसा हाल कहीं हुआ है?
बाहुक सुबाहु नीच लीचर मरीच मिलि, मुँहपीर केतुजा कुरोग जातुधान हैं।
रामनाम जपजाग कियो चहों सानुराग, काल कैसे दूत भूत कहा मेरे मान हैं॥ सुमिरे सहाय रामलखन आखर दोऊ, जिनके समूह साके जागत जहान हैं।
तुलसी सँभारि ताड़का सँहारि भारी भट, बेधे बरगदसे बनाइ बानवान हैं॥Bahuk Subahu neech leechar Mareech mili, munhpeer Ketuja kurog jatudhan hain. Ramnam japjaag kiyo chahon sanurag, kaal kaise doot bhoot kaha mere maan hain. Sumire sahay Ramlakhan aakhar dou, jinke samooh saake jagat jahan hain. Tulsi sanbhari Tadka sanhari bhari bhat, bedhe bargad se banai banvan hain.
यह बाँह-पीड़ा नीच सुबाहु है जो दुष्ट मारीच से मिल गया है, और मुँह की पीड़ा सुकेतु की बेटी ताड़का है; ये रोग राक्षस हैं। मैं प्रेम से राम-नाम के जप का यज्ञ करना चाहता हूँ, काल के दूत और भूत मेरे सामने क्या हैं? राम और लक्ष्मण के नाम का स्मरण सहायता देता है, जिनके पराक्रम सारा जग जानता है; हे तुलसी, याद कर कि उन्होंने ताड़का को मारा और बरगद जैसे बड़े योद्धाओं को बाणों से बेध दिया।
बालपने सूधे मन राम सनमुख भयो, रामनाम लेत माँगि खात टूकटाक हौं।
पर्यो लोकरीतिमें पुनीत प्रीति रामराय, मोहबस बैठो तोरि तरकितराक हौं॥ खोटे खोटे आचरन आचरत अपनायो, अंजनीकुमार सोध्यो रामपानि पाक हौं।
तुलसी गोसाइँ भयो भोंड़े दिन भूलि गयो, ताको फल पावत निदान परिपाक हौं॥Balpane soodhe man Ram sanmukh bhayo, Ramnam let maangi khaat tooktak haun. Paryo lokreeti mein puneet preeti Ramray, mohbas baitho tori tarkitarak haun. Khote khote aacharan aacharat apnayo, Anjanikumar sodhyo Rampani paak haun. Tulsi Gosain bhayo bhonde din bhooli gayo, tako phal pavat nidan paripak haun.
बचपन में मैं सीधे मन से राम के सम्मुख हुआ और राम-नाम लेते हुए माँगे हुए टुकड़े खाता था; फिर संसार की रीति में पड़कर, मोह के वश में, तर्क-वितर्क से राजा राम की पवित्र प्रीति तोड़ बैठा। खोटे आचरण करने पर भी राम ने मुझे अपनाया और अंजनीकुमार ने राम के हाथों मुझे शुद्ध किया; तुलसी गोसाईं बन गया और बुरे दिन भूल गया, उसी का पका हुआ फल अब पा रहा है।
असन बसन हीन बिषम बिषाद लीन, देखि दीन दूबरो करै न हाय हाय को।
तुलसी अनाथ सो सनाथ रघुनाथ कियो, दियो फल सीलसिंधु आपने सुभायको॥ नीच यहि बीच पति पाइ भरुहाइगो, बिहाइ प्रभु भजन बचन मन कायको।
तातें तनु पेषियत घोर बरतोर मिस, फूटि फूटि निकसत लोन रामरायको॥Asan basan heen bisham bishad leen, dekhi deen doobro karai na haay haay ko. Tulsi anath so sanath Raghunath kiyo, diyo phal seelsindhu aapne subhay ko. Neech yahi beech pati paai bharuhaigo, bihai Prabhu bhajan bachan man kaay ko. Taten tanu peshiyat ghor bartor mis, phooti phooti nikasat lon Ramray ko.
भोजन और वस्त्र से हीन, गहरे विषाद में डूबे, दीन और दुर्बल को देखकर कौन हाय-हाय न करता? शील के सागर रघुनाथ ने अनाथ तुलसी को सनाथ किया और अपने स्वभाव का फल दिया; पर इसी बीच यह नीच स्वामी पाकर घमंडी हो गया और मन, वचन व शरीर से प्रभु का भजन छोड़ दिया। इसीलिए शरीर पर भयानक फोड़ों के बहाने राजा राम का खाया हुआ नमक फूट-फूटकर निकल रहा है।
जीओं जग जानकीजीवनको कहाइ जन, मरिबेको बारानसी बारि सुरसरिको।
तुलसीके दुहूँ हाथ मोदक है ऐसे ठाउँ, जाके जिये मुये सोच करिहैं न लरिको॥ मोको झूठो साँचो लोग रामको कहत सब, मेरे मन मान है न हरको न हरिको।
भारी पीर दुसह सरीरतें बिहाल होत, सोऊ रघुबीर बिनु सकै दूर करि को॥Jeeon jag Janakijeevan ko kahai jan, maribe ko Baranasi baari Sursari ko. Tulsi ke duhoon haath modak hai aise thaun, jake jiye muye soch karihain na lariko. Moko jhootho sancho log Ram ko kahat sab, mere man maan hai na Har ko na Hari ko. Bhari peer dusah sareer ten bihal hot, sou Raghubeer binu sakai door kari ko.
मैं संसार में जानकी-जीवन राम का सेवक कहलाकर जीऊँ और मरूँ तो वाराणसी में गंगा के जल के पास; ऐसी जगह तुलसी के दोनों हाथों में लड्डू हैं, जहाँ जीने-मरने की चिंता बच्चा भी न करे। झूठा हो या सच्चा, सब लोग मुझे राम का ही कहते हैं, और मेरे मन में शिव या विष्णु किसी और का होने का अभिमान नहीं; असह्य भारी पीड़ा से शरीर बेहाल है, रघुवीर के बिना इसे कौन दूर कर सकता है?
सीतापति साहेब सहाय हनुमान नित, हित उपदेसको महेस मानो गुरुकै।
मानस बचन काय सरन तिहारे पाँय, तुम्हरे भरोसे सुर मैं न जाने सुरकै॥ ब्याधि भूतजनित उपाधि काहू खलकी, समाधि कीजे तुलसीको जानि जन फुरकै।
कपिनाथ रघुनाथ भोलानाथ भूतनाथ, रोगसिंधु क्यों न डारियत गाय खुरकै॥Sitapati saheb sahay Hanuman nit, hit updesh ko Mahes mano guru kai. Manas bachan kaay saran tihare paany, tumhare bharose sur main na jane sur kai. Byadhi bhootjanit upadhi kahoo khal ki, samadhi keeje Tulsi ko jani jan phur kai. Kapinath Raghunath Bholanath Bhootnath, rogsindhu kyon na dariyat gaay khur kai.
सीतापति मेरे स्वामी हैं, हनुमान सदा मेरे सहायक हैं, और हितकारी उपदेश देने वाले महेश को मैं गुरु मानता हूँ; मन, वचन और शरीर से मैं तुम्हारे चरणों की शरण में हूँ, और तुम्हारे भरोसे मैंने दूसरे देवताओं को देवता नहीं जाना। यह रोग भूतों से हुआ हो या किसी दुष्ट की करतूत हो, तुलसी को सच्चा सेवक जानकर इसका अंत करो; हे कपिनाथ, रघुनाथ, भोलानाथ, भूतनाथ, इस रोग के सागर को गाय के खुर जितना क्यों नहीं कर देते?
कहों हनुमानसों सुजान रामरायसों, कृपानिधान संकरसों सावधान सुनिये।
हरष बिषाद राग रोष गुन दोषमई, बिरची बिरंचि सब देखियत दुनिये॥ माया जीव कालके करमके सुभायके, करैया राम बेद कहैं साँची मन गुनिये।
तुम्हतें कहा न होय हाहा सो बुझैये मोहि, हौं हूँ रहों मौन ही बयो सो जानि लुनिये॥Kahon Hanuman son sujan Ramray son, kripanidhan Sankar son savdhan suniye. Harash bishad raag rosh gun doshmai, birachi Biranchi sab dekhiyat duniye. Maya jeev kaal ke karam ke subhay ke, karaiya Ram bed kahain sanchi man guniye. Tumh ten kaha na hoy haha so bujhaiye mohi, haun hoon rahon maun hi bayo so jani luniye.
मैं हनुमान से, सुजान राजा राम से और कृपानिधान शंकर से कहता हूँ, ध्यान से सुनिए; ब्रह्मा ने यह सारी दुनिया हर्ष-विषाद, राग-रोष और गुण-दोष से भरी रची है। वेद कहते हैं कि माया, जीव, काल, कर्म और स्वभाव के करने वाले राम हैं, यह मैं मन में सच मानता हूँ; तुमसे क्या नहीं हो सकता? हाय, यह मुझे समझा दो, नहीं तो मैं चुप ही रहूँगा, यह जानकर कि जो बोया है वही काटना है।