মঙ্গলচণ্ডী ব্রতকথা
Mangal Chandi Vrata Katha
রত্নাবতী নামে এক ভক্তিমতী সধবা ব্রাহ্মণী ছিল।
কামিনী নামে এক নাপিতানি তার সই ছিল।
একদিন নাপিতানি বললে, সই, আমার খুব দুঃখ-কষ্ট, কী করি বল তো? ব্রাহ্মণী বললেন, জ্যৈষ্ঠ মাসের প্রতি মঙ্গলবারে মঙ্গলচণ্ডীর ব্রত কর।Rotnaboti name ek bhoktimoti shodhoba brahmoni chhilo. Kamini name ek napitani tar shoi chhilo. Ekdin napitani bolle, shoi, amar khub dukkho-koshto, ki kori bol to? Brahmoni bollen, Joishtho masher proti Mongolbare Mongolchondir broto kor.
रत्नावती नाम की एक भक्त, सुहागिन ब्राह्मणी थी। कामिनी नाम की एक नाइन उसकी सहेली थी। एक दिन नाइन बोली, “सखी, मुझे बहुत दुख-कष्ट है, बताओ क्या करूँ?” ब्राह्मणी ने कहा, “ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को मंगलचंडी का व्रत करो।”
সইয়ের কথা শুনে সে ব্রত করল, তার ফলে তার সব দুঃখ ঘুচে গেল।
কিছুদিন পরে সে সুখ সহ্য করতে না পেরে, কী করবে ভেবে না পেয়ে, বেনেদের লাউগাছ ছিঁড়ে দিল, তাতে গাছ আরও বেড়ে গেল।Shoiyer kotha shune she broto korlo, tar phole tar shob dukkho ghuche gelo. Kichhudin pore she shukh shojjo korte na pere, ki korbe bhebe na peye, beneder laugachh chhinre dilo, tate gachh aro bere gelo.
सहेली की बात मानकर उसने व्रत किया और उसके सारे दुख दूर हो गए। कुछ दिन बाद वह सुख सह नहीं पाई और यह न सूझने पर कि क्या करे, उसने बनियों की लौकी की बेल उखाड़ दी, पर बेल और बढ़ गई।
শেষে যুক্তি করে ভাগাড়ে গিয়ে রাজার মরা হাতি ধরে কাঁদতে লাগল, হাতি মঙ্গলচণ্ডীর দয়ায় বেঁচে উঠল।
এ সংবাদ শুনে রাজা নাপিতানিকে খুব আদর-যত্ন করলেন।Sheshe jukti kore bhagare giye rajar mora hati dhore kandte laglo, hati Mongolchondir doyay benche uthlo. E shongbad shune raja napitanike khub ador-jotno korlen.
फिर सोच-समझकर वह मरे जानवर फेंकने की जगह पर गई और राजा के मरे हाथी को पकड़कर रोने लगी; मंगलचंडी की दया से हाथी जी उठा। यह समाचार सुनकर राजा ने नाइन का बहुत आदर-सत्कार किया।
শেষে বিষের নাড়ু তৈরি করে নাপিতানি জামাইবাড়ি পাঠাল, কিন্তু তাতেও তারা মরল না।
তখন নাপিতানি ব্রত করা বন্ধ করতেই তার বাড়ি-ঘর পুড়ে ধ্বংস হয়ে গেল, মেয়ে-জামাই মরল।
নাপিতানি কাঁদতে লাগল।Sheshe bisher naru toiri kore napitani jamaibari pathalo, kintu tateo tara morlo na. Tokhon napitani broto kora bondho kortei tar bari-ghor pure dhwongsho hoye gelo, meye-jamai morlo. Napitani kandte laglo.
फिर नाइन ने ज़हर के लड्डू बनाकर दामाद के घर भेजे, पर फिर भी वे नहीं मरे। लेकिन जैसे ही उसने व्रत करना बंद किया, उसका घर-बार जलकर नष्ट हो गया और बेटी-दामाद मर गए। नाइन रोने लगी।
শেষে মা মঙ্গলচণ্ডী ছদ্মবেশে দেখা দিলেন।
নাপিতানি কাঁদতে কাঁদতে তাঁর পায়ে ধরে সব কথা বলল।
মা মঙ্গলচণ্ডী সব শুনে তাকে আবার ভক্তিভরে ব্রত করতে বললেন।Sheshe Ma Mongolchondi chhodmobeshe dekha dilen. Napitani kandte kandte tar paye dhore shob kotha bollo. Ma Mongolchondi shob shune take abar bhoktibhore broto korte bollen.
आखिर में माँ मंगलचंडी ने वेश बदलकर दर्शन दिए। नाइन ने रोते-रोते उनके पैर पकड़कर सारी बात बताई। सब सुनकर माँ मंगलचंडी ने उसे फिर से भक्ति के साथ व्रत करने को कहा।
ব্রত করার ফলে নাপিতানি আবার ঘর-বাড়ি, জমি-জমা ফিরে পেল, মরা মেয়ে-জামাই বেঁচে উঠল।
মা মঙ্গলচণ্ডীর দয়ায় তার সব দুঃখ ঘুচে গেল।
সেই থেকে এই ব্রত সর্বত্র প্রচার হল।Broto korar phole napitani abar ghor-bari, jomi-joma phire pelo, mora meye-jamai benche uthlo. Ma Mongolchondir doyay tar shob dukkho ghuche gelo. Shei theke ei broto shorbotro prochar holo.
व्रत करने से नाइन को फिर से घर-बार और ज़मीन-जायदाद मिल गई, और मरे हुए बेटी-दामाद जी उठे। माँ मंगलचंडी की दया से उसके सारे दुख दूर हो गए। तभी से यह व्रत हर जगह फैल गया।